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पतझड़

आज आखिरकार वो आई मुझसे मिलने, उसी cafe में जहाँ धीमी आवाज़ में music सुनाई दे रहा था, coffee कि खुशबु एक स्वर्ग जैसा अहसास दे रही थी, किताबों कि महक से दिल भी महक उठा था, भीड़ भी मानो ना के बराबर थी. आज ये सब छोटी छोटी चीजें काफी महत्वपूर्ण लग रही थी. क्युंकी पूरे 21 दिन के Lockdown के बाद हम दोनो एक दूसरे से मिल रहे थे, उसी जगह जहां मेरी उस से पहली बार मुलाकात हुई थी.

“अगर आपको कोई ऐतराज ना हो, तो क्या मैं यहाँ बैठ सकती हुं? Cafe almost House-full है.”

“अरे No problem, बिलकुल.”

“तो आप writer हो?”, मेरी डायरी कि तरफ इशारा करते हुए उसने पूछा.

“हाहाहा..नहीं…बस जो किस्से मेरे साथ या मेरे आजु-बाजु घटते है उन्ही को जोड कर इस डायरी में लिखता हुं.”

“कैसे कर लेते हो यार, मुझसे तो दो lines भी ढंग कि नहीं लिखी जाती.”

“अरे आसान है…जिस से तुम्हें प्यार हो, या जिसके बारे में लिखना हो..बस सोचों कि वो इंसान तुम ही हो.”

“पर अगर किसी से प्यार ही ना हो तो?”

“तो अपने आप से तो कर ही सकती हो ना?”

इस तरह मेरी उस से आज से ठीक 23 दिन पहले रविवार कि शाम को मुलाकात हुई थी, बहोत सी बातें हुई. उसे मैं interesting लगा शायद, और जाते जाते उसने मुझसे मेरा number भी मांग लिया.

घर जाते ही देखा तो मेरे Instagram कि सारी post उसने like कि थी, मुझे follow किया था, Facebook पे friend request आई थी और whatsapp पे उसका message भी आया था.

“आप बहुत ही interesting इंसान लगे मुझे, आपकी सारी पोस्ट देखी और पढ़ी मैंने, काफी अच्छे कलाकार हो आप. मैं तो बेहद impress हो गई हुं.”

“जी शुक्रिया, मैं अच्छा कलाकार हूँ वो तो समझ आ गया, पर ये ‘आप’ कौन है?”

“जी, आप.”

“नहीं, मै तो ‘तुम’ हुँ.”

“हाहाहा, वाह यार काफी अच्छा flirt कर लेते हो तुम तो, फिर भी अब तक single कैसे हो?”

“हाहाहा…खुद से और खुद कि कलाकारी पर प्यार कर ने में व्यस्त था, तो कभी वक्त ही नही मिला.”

“ज़रा आजु-बाजु देखा करो क्या पता कोई तुम्हारे इंतजार में खड़ी हो, और तुम्हें पता ही ना हो?”

“अगर सच में ऐसी कोई होगी तो वो खुद आयेगी और अपने दिल का इज़हार कर देगी.”

“काफी optimistic हो.”

“शायद.”

पुरी रात हम एक दूसरे से बाते करते रहे, दूसरे दीन office जाने में late हुआ, काम भी बहुत था तो घर आने में भी late हुआ, जब सोते वक्त mobile check किया तो उसी का message आया था, 2 घंटे पहले.

“Hi, मुझे लगा इतनी बाते की हम ने कल रात, तो आज तुम्हारा कोई message आयेगा, पर तुम तो ज़ाकिर खान से भी ज्यादा सख्त लौंडा मालूम पड़ते हो.”

“अरे sorry, ऐसी कोई बात नहीं है, थोडा busy था.”

“Please! Sorry मत बोलो, मैं तो मज़ाक कर रही थी. मैंने भी कुछ लिखा था, सोचा तुम्हें दीखा दूँ.”

“अरे ज़रूर, नेकी और पूछ-पूछ.”

ना जाने क्यूँ पर उसकी तारीफ़ करने का मन किया, मैंने दिल खोल के उसकी लिखी शायरी की तारीफ की, वो खुद की ख़ुशी बयान नहीं कर पा रही थी, उसे कुछ कहना था शायद पर वो खुल के कह नहीं पायी.

मंगलवार की शाम 5 बजे उस का फिर से message आया,

“क्या, हम फिर से एक बार मिल सकते है?”

“क्यूँ, कुछ काम था?”

“मैं इतनी मतलबी लगती हूँ तुम्हे?”

“मेरा कहने का वो मतलब नहीं था.”

“मुझे तुमसे बहुत सी बातें करनी है, तुम्हारी लिखी हर कहानी मेरे दिल को बहुत भाती है, तुम्हारी कलाकारी की मैं fan हो चुकी हुं, और तुम हो की मुझे मतलबी समझ रहे हो.”

“ओके बाबा सॉरी…कल मिले? गुढीपाडवा की छुट्टी भी है.”

“यार तुम कितने सीधे साधे हो, कितने जल्दी sorry बोल देते हो. और हाँ मिलते है कल उसी जगह. बाय.”

Office से घर आते ही शाम को पिताजी ने मुझसे कहा, ‘वो जरा news channel लगाना, आज मोदी जी का भाषण है’, मैंने उनकी बात को टाल कर Movie चला दी.

Movie ख़त्म होते ही रात 11 बजे पिताजी ने news लगाने की बात फिर से छेड़ दी, मैंने बड़े कष्ट से channel चेंज किया तो देख के चौक गया,

“मित्रों, आज रात 12 बजे से अगले 21 दिन के लिए पूरा इंडिया संपूर्ण लॉकडाऊन किया जा रहा है, घर में रहे और Corona Virus से देश को बचायें.”, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नें TV पर कहा.

घर में एकदम से भगदड़ मच गई थी, माँ ने कहा की सिर्फ 8 दिन का ही राशन बचा है, और तभी फिर से news आई की panic buying ना करे, जीवनावश्यक चीजों की दुकानें चालू रहेगी.

दूसरे दिन गुढीपाडवा की पूजा करने में सारा दिन चला गया, शाम में उस से मिलने जाने की बात याद आई, मैंने फोन चेक किया, पर उसका कोई message नहीं आया था.

‘क्या इस लड़की से मिलना इतनी आवश्यक बात है?’

‘क्या पता कही ये वो तो नहीं जो मेरी राह देख रही हो और मुझे पता ही नहीं’

मैंने उस से मिलने की ठान ली, उसी वक़्त किसी ने Facebook पे एक वीडियो share किया था, पुलिस बाहर निकल रहे हर एक इंसान को चुन चुन के लाठी से धो रही थी और मेरी वही पे फट गई, मैने हिम्मत जुटा के उसे message किया.

“अगले 21 दिन तक अपना मिलना मुश्किल लग रहा है, अगर तुम कहो तो मैं आ सकता हूँ.”

“मरने का इतना शौक कब से चढ़ गया तुम्हें? चुपचाप घर पे बैठे रहो, हम 21 दिन बाद मिल लेंगे.”

सुन के दिल को सुकून सा मिला, क्योंकि पुलिस का डंडा पड़ने से बच गया था मैं.

इस 21 दिन दौरान हम एक दूसरे को काफी अच्छी तरह जान ने लगे थे, Work From Home की वजह से काम भी बहोत ज्यादा हो रहा था, ना कोई चाय ब्रेक, ना 1-1 घंटे का lunch break, Lockdown होने से जहा हमें लगा था की घर पे बैठे मौज मस्ती करेंगे, पर पूरा उल्टापुल्टा हो गया था. आखिर ब्रेक लेकर जाए तो कहाँ जाए, या तो बाथरूम या किचन या लिविंग रूम.

पर शाम को काम ख़त्म होते ही मैं कभी अपनी गिटार ले के बाल्कनी में गाने गुनगुना लेता था, तो कभी शायरी लिख देता था, या फिर कभी स्केच कर लेता था. Instagram पे नए नए चैलेंजेस में भी टाइम-पास हो रहा था, गिटार पर गाने पोस्ट करने में भी अच्छा वक्त गुज़र रहा था, और रात में उस से chatting तो हो ही जाती थी, वो भी भरपूर. क्यूंकी बाहर जाने के सब दरवाज़े बंद थे.

“तुमसे एक बात पुछनी थी?” एक दिन उस का अचानक से message आया.

“पुछो ना.”

“मुझे तुम्हारी रोज की Insta Stories देख कर गिटार सिख ने का मन कर रहा है, help कर सकते हो मेरी सिख ने में? क्यूंकी ऑफ़िस के काम के सिवा, मुझे कुछ नहीं आता, तो मैं bore हो जाती हूँ घर पे बैठे बैठे.”

उसे कुछ online links देकर, कुछ tips देकर गिटार सिखाने की process चालू की. उसे वो सब चीज़े पसंद थी जो मैं करता था. और उसे वो सब कर के देखना था. वो 21 दिन में जैसे हम एक दूसरे के प्यार में पड़ गए थे, पर समझ नहीं रहा था. हम दोनों की tuning तो एकदम match हो रही थी. एक दूसरे को अपने बारे में बताने में हम थक नहीं रहे थे, वरना इस से पहले किसी को कोई कहानी पढ़ने बोलो तो वो 1-2 lines पढ़ के “बढ़िया” कह के छोड़ देती थी. पर इस लड़की की बात कुछ अलग थी, जैसे प्यासे को पानी की तलाश होती हो वैसे वो मेरे लिखी कहानियों में मग्न हो जाती थी, और मेरी तारीफ़ करने का एक भी मौका नहीं छोड़ती थी. मुझे ये नहीं समझ रहा था की वो मेरी लिखी कहानियों के प्यार में है या मेरे.

और एक दिन खुषख़बर आई की Corona Virus, India से पूरी तरह ख़त्म हो चुका है और अब जैसे तय हुआ था वैसे 21 दिन बाद मतलब कल लॉकडाऊन उठाया जाने वाला था. सब खुश थे, Instagram पे लोग सवाल पूछने लगे थे की 21 दिन बाद कल सब से पहले तुम किससे मिलोगे. और मेरे दिल में पहला ख़याल उसी का आया.

इस बार मैंने उसे message किया.

“तुम कल सबसे पहले किसे मिलने वाली हो?”

“है कोई, जिसे मैं बेहद पसंद करती हूँ.”

“ओहो, कौन है वो ख़ुशनसीब?”

“है एक कलाकार टाइप इंसान, जिस से मैं बहुत कुछ सिख चुकी हूँ इन 21 दिनों में.”

“अच्छा, दिखने में कहीं वो काला तो नहीं?”

“हाँ थोड़ा सा, पर काफी हैंडसम है.”

“अच्छा.”

“क्या अच्छा? अरे बुद्धु मैं तुम्हारी बात कर रही हूँ, इतने hints के बाद भी नहीं समझे क्या?”

“ओह, हां समझा था पर जब तुम ने handsome कहा तो थोडा…”

“शटाप…you are handsome, and I like Tall Dark N Handsome”

“Wait.., you mean..?”

“Nothing, कल मिल के बात करें? बहोत नींद आ रही है.”

“ओके, कल शाम 5 बजे, उसी जगह. Good Night.”

मैं बेहद खुश था, एक तो बाहर मौसम बहुत ही प्यारा हो गया था, पंछीयों की आवाज़ से मानो मैं खुद एक पंछी जैसा महसूस कर रहा था, जो अब पिंजरे से आज़ाद हो कर निकल पड़ा था अपने किसी खास से मिलने.

आज आखिरकार वो आई मुझसे मिलने, उसी cafe में जहाँ धीमी आवाज़ में music सुनाई दे रहा था, coffee कि खुशबु एक स्वर्ग जैसा अहसास दे रही थी, किताबों कि महक से दिल भी महक उठा था, भीड़ भी मानो ना के बराबर थी. आज ये सब छोटी छोटी चीजें काफी महत्वपूर्ण लग रही थी. क्युंकी पूरे 21 दिन के Lockdown के बाद हम दोनो एक दूसरे से मिल रहे थे, उसी जगह जहां मेरी उस से पहली बार मुलाकात हुई थी.

पर मुझे देख कर बड़ी सहमी सी हुई थी वो, डर रही थी मुझसे या फिर इस नई दुनिया से, मालूम नहीं.

मेरी कुर्सी से उठ के मैने उसे मेरी सामने वाली कुर्सी पे बैठा दिया और खुद जाकर मेरी कुर्सी पे बैठ गया अपनी डायरी के पन्नों के साथ खेलते हुए.

चाय बहोत पसंद थी उसे, मेरे टेबल पे एक खाली कप कॉफी पड़ी थी, मैंने झट से उसे पूछा.

“चाय?”

चाय सुन के उसकी nervousness कम हो गयी थी शायद.

उसने तुरंत अपनी गर्दन हिला के हाँ कह दिया.

मैं उठा अपनी जगह से और चला गया counter की तरफ उसके लिए चाय और मेरे लिए कॉफी लेने.

Cafe की कांच से शाम की केसरिया धुप छन के अंदर आ रही थी, जिस से उसकी खूबसूरती और ज्यादानिखर रही थी. बहुत खुबसुरत थी वो.

मैं चाय और कॉफी लेकर मेरी कुर्सी पे आकर बैठ गया.

मुझे लगा यही समय है बात करने का जिसके लिए मैंने उसे यहाँ मिलने बुलाया था.

“कैसे रहे तुम्हारे 21 दिन?”, मैंने उस से पूछा.

“अच्छे थे.”, पूरे 23 दिन बाद उसकी आवाज़ मैंने तब जा के सुनी.

“हाँ गिटार सिख ली ना तुमने तो? शायरी भी तो भेजी थी तुमने मुझे, बहोत अच्छी थी.”

“Thanks to you..!!!”

“अरे उसमे क्या थैंक यु, वो छोड़ो तुम कल रात कुछ कह रही थी, यु लाइक Tall,Dark & Handsome?”

“Frankly Speaking, मुझे वो नहीं कहना चाहिए था शायद, पता नहीं मैने वो क्यूँ बोला. पर हाँ गिटार, शायरी वो सब जो तुमने अभी कहा वो सब तुम्हारी वजह से ही possible हुआ, और उसके लिए मैं तुम्हें Thank You कहना चाहती हूँ, पूरे दिल से. Thank You so much मुझे ये सब चीज़ों में interest दिलवा ने के लिए.”

“मैं कुछ समझा नहीं…मतलब you didn’t mean it, जब तुमने वो सब कहा?”

“नहीं नहीं..I mean it अभी भी, You are handsome…लेकिन तुम्हें जैसे मैं 23 दिन पहले मिली थी मैं अब वैसी नहीं रही. याद है जब हम पहली बार मिले थे तब मैंने तुमसे पुछा था की अगर किसी से प्यार न हो तो क्या करे?”

” हाँ..मैंने कहा था की खुद से प्यार कर के देखो.”

“Exactly, तुम्हारी वो बात मेरे दिल को इतना छु गई थी, पर मुझे समझ नहीं रहा था की वो मैं करूँ कैसे, और धीरे धीरे मैं तुम्हारी लिखी कहानियों में खुद को ढूंढने लगी, उसी वजह से मैंने तुमसे मिलने के लिए पूछा था”

“हाँ मैं भी मिलने आने वाला था पर तुम्हें तो पता है क्या हालात थे सब के साथ.”

“हाँ I know, पर जैसे ही ये Lockdown हुआ, मुझे खुद के लिए बहोत समय बिताने को मिला, और मैं तुम्हारी शुक्रगुज़ार हूँ की तुमने मुझे खुद से प्यार कर ने में help की. मुझे कभी नहीं लगा था की मैं अंदर से इतनी खूबसूरत हूँ .”

“ओके, मैं थोड़ा confuse हो गया हूँ. तुम्हें तो मेरे बारे में अब सब पता है, तुम्हें ये भी पता है की मैं सिंगल क्यूँ हूँ, मैंने इस से पहले ये बात कभी किसी से नहीं की, पर आज हिम्मत जुटा के बता रहा हूँ, मुझे लगता है की मैं तुम से प्यार करने लगा हूँ, आज तक जितनी भी लड़कियाँ देखी वो ज्यादा तर पैसा या खूबसूरती पर मरती देखी है मैंने, पर तुम पहली ऐसी लड़की हो, जिसने दिल देखा, जो मेरी कलाकारी को इतना चाहती है, मेरी कहानियो की तो फॅन है. और ये 21 दिन तुमसे बाते करने में कैसे कट गए पता ही नहीं चला, I think I fell in love with you.”

“बुरा मत मानना प्लीज़, पर मैं यही बात कहने की कोशिश कर रही हुं की ये जो कुछ भी तुमने अभी कहा वो सब इन 21 दिनों का असर है, अकेलेपन में हमें एक दूसरे के सिवा कोई और नहीं था बात करने के लिए इसलिए तुम इसे प्यार समझ बैठे हो, दर असल बात ये है की मुझे ये नई दुनिया बिलकुल पसंद नहीं आ रही है अब, ये जो 21 दिन बाद घर से आज़ादी मिली है लोगो को वो मुझे रास नहीं आ रही अब, क्यूँकि मैं अब खुद से प्यार करना सिख चुकी हूँ, मैं खुद से ज्यादा किसी और को चाहती भी नहीं. मैं तो कल बस तुम्हारा दिल रखने के लिए वो बात कह गयी तुमसे, पर तुम हो बहोत प्यारे, handsome भी हो उसमें कोई शक नहीं, और हां वो शायद मेरा प्यार तुम्हारे लिए नहीं था बल्कि तुम्हारी कहानियों से था, और उन कहानियों की मैं हमेशा हमेशा के लिए FAN रहूँगी और मोहब्बत करती रहूँगी, and trust me nobody can afford to leave a guy like you, तुम एक आज़ाद पंछी हो, जो खुले आसमान में उड़ना भी जानता है और जब बारिश या तूफ़ान आये तो अपने घोंसले में शांति से बैठना भी जानता है, मैं वैसी नहीं हूँ, मैं अपनी तलाश दुसरो में कर रही थी, और तुम मिल गए और तुमने मुझे अपनी खुद की तलाश मेरे अंदर ही करवा दी. तुम को खो कर मैंने खुद को पाया है और इस क़दर मुझ को जीना आया है. सिर्फ और सिर्फ तुम्हें शुक्रिया कहने के लिए मैं अपनी आज़ादी छोड़ कर इस भीड़ में आई हूँ, देखना तुम्हें ऐसी कोई मिल जायेगी जो खुद के साथ साथ तुमसे भी प्यार करेगी, और तुमसे कौन नहीं प्यार कर सकता.Thank You so much, I hope you understand.”

मेरे पास लफ्ज़ नहीं थे उसे कुछ कहने के लिए, जो खुद की तलाश में निकल पड़ी थी, पर मैं जिसकी तलाश में था ये शायद वही थी शत-प्रतिशत, लगा था वो समझ जाएगी, वो जाने लगी तो उसे रोकना चाहा, कहना चाहा की मेरी तलाश तुम ही हो, लेकिन कह नहीं पाया, लगा था वो समझ जाएगी, पर मैं गलत था.

सच बताऊँ, मुझे पहली बार उस Cafe में बेहद अकेला महसूस हो रहा था, जहाँ पहले मैं अकेला बैठ कर भी खुद को पूरा महसूस करता था, मैं उन सब लोगो को देख रहा था जो अभी भी Social Distancing कर के बैठे थे, वो जाते जाते उस शाम के अंधेरे में जैसे खो सी गई. उसे रोकने के लिए मैं अपनी जगह से उठने वाला ही था लेकिन इन 21 दिन में आजु-बाजु की छोटी सी छोटी आवाजें बहोत स्पष्ट सुन ने की जैसे आदत सी हो गई थी. लोगो की कोरोना वायरस के चलते हम दोनों की इतने पास बैठने की खुसपुसाहट को सुनने के बाद मेरे कान, जैसे मानो मेरी नजर cafe में चल रहे गाने की ओर पड़ी,

“फुल खिलते है, लोग मिलते है, मगर पतझड़ में जो फुल बिखर जाते है, वो बहारो के आने से मिलते नहीं,

कुछ लोग जो युँही बिछड़ जाते है वो हजारों के आने से मिलते नहीं,

एक बार चले जाते है जो दिन-ओ-रात-सुबह-शाम,

वो फिर नहीं आते, वो फिर नहीं आते,

जिंदगी के सफ़र में गुज़र जाते है जो मक़ाम, वो फिर नहीं आते, वो फिर नहीं आते.”

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