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ऐ इन्सान रुक जा जरा

In this beautiful Hindi poem, Gourav asks fellow human beings to pause and think about the consequences of their actions.

ऐ इन्सान रुक जा जरा
क्युं है इतना घमंड
हर चीज़ के जिम्मेदार
खुद ही तो है हम
खुद ही तो है हम

आसमानों को किसने चीरा
धरती को किसने किया खत्म
खुद पे ना कर सितम
हर चीज़ का जिम्मेदार
खुद ही तो है हम

ये जहान कर रहा है
तेरे घमंड को खत्म
अब भी समय है
छोड़ दे ये घमंड
हर चीज़ का जिम्मेदार
खुद ही तो है हम

थम जा जरा, रोक ले खुदको
जिन्दगी दे रही है मौका फ़िर जीने का तुझको
अब भी ना रुका तो हो जाएगा सब खत्म क्योंकि
हर चीज़ का जिम्मेदार
खुद ही तो है हम

आओ सब मिलके एक प्यारी दुनिया बनाए
साथ मिल कर चले, एक दूसरे का साथ निभाए
इस नई दुनिया का जिम्मेदार भी
खुद ही होंगे हम
खुद ही होंगे हम

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